01 मई

एक दुःखद प्रेम कहानी

श्री गणेश

आइए कहानी का श्री गणेश अपनी नायिका कजरी के एक व्हाट्सएप्प सन्देश से करते हैं जो उसने केतुल मंदी को लिखा था।

“प्यारे केतुल बाबा…”

ओहो, मैं भी ना! आप तो जानते ही नहीं कि ये कजरी कौन हैं और केतुल मंदी से इसका क्या रिश्ता था। आप को इनके व्हाट्सएप्प संदेशों से क्या लेना देना? अरे तो चलिए फिर कहानी में सबसे पहले अपने नायक और नायिका का परिचय आपसे करवाता हूँ।

परिचय

दर असल मंदी खानदान शहर का सबसे पुराना और रसूख वाला खानदान था। इस खानदान की शुरूआती पीढ़ियों ने अपने व्यापार की दिन दूनी रात चौगुनी प्रगति होते देखी थी। एक जमाना था कि पूरे शहर में केवल और केवल मंदी प्रोडक्ट्स की ही बिक्री होती थी। ख़ानदान की शुरूआती पीढ़ी ने थोड़ी बहुत दान-दक्षिणा कर के शहर के ज्यादातर निवासियों का दिल भी जीत लिया था।

कहते है इस खानदान का नाम हमेशा से ‘मंदी’ खानदान नहीं था। इस बारे में विभिन्न मत थे कि कब और कैसे इन लोगों का नाम मंदी पड़ गया था। एक किवदंती के अनुसार पुराने समय में मंदी नाम के एक बहुत ही दयालु अविष्कारक हुए थे और किसी कारणवश ख़ुश होकर उस दयालु अविष्कारक ने न सिर्फ अपनी पूरी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी बल्कि मंदी नाम का कॉपीराइट भी इनको सौंप दिया था। कुछ लोग ये भी कहते थे कि इन लोगों ने कॉपीराइट चुरा लिया था। आज कल कुछ लोग मजाक में ये भी कहने लगे थे कि इस नाम की वजह से उनकी आज की पीढ़ी मंदबुद्धि हो रही है। खैर हमें क्या?

इनके बारे में कुछ और भी बताना जरूरी समझता हूँ।

पिछले कुछ सालों में मार्केट में नयी कंपनियों के आ जाने से इनके कारोबार में कुछ कमी तो आयी थी मगर हाथी मरा भी तो नौ लाख का। खास तौर पर मंदी खानदान की बहू मैडम मोना मंदी जी के बिज़नेस सेंस की तो सभी तारीफ करते हैं। इन्होने इन नयी कंपनियों से कई समझौते किये जिसके तहत नयी कंपनियाँ अपने खुद के प्रोडक्ट्स बनाने की बजाय इन्हीं का माल डिस्ट्रीब्यूट करती थीं और मुनाफे में अपना हिस्सा ले लेती थीं। मंदी ख़ानदान की धन सम्पदा में कोई कमी नहीं आयी थी। हमारा नायक केतुल इसी खानदान का इकलौता वारिस और मैडम मोना का बेटा है।

बहुत हो गया मंदी खानदान के कारोबार का वर्णन। आप थोड़ा बोर फील कर रहे होंगे। सॉरी सॉरी। अपने कनाडा वाले शुकुल जी कहते हैं कि कहानी में बीच-बीच में मसाला डालते रहो तो पाठकगण का चाव बना रहता है। तो लीजिये पेश है कुछ मसाला। मेरा मतलब कजरी का परिचय।

पिछले साल से शहर में कजरी नाम की एक बेहद खूबसूरत नृत्यांगना रहने लगी है। एक तो बला की खूबसूरत उस पर मनमोहक नृत्य की अदाएँ। एक ही नज़र में लोगों को दीवाना बना देती है कजरी। उसके नृत्य के कार्यक्रम तो इतने लोकप्रिय हो रहे थे कि थिएटर में पाँव रखने की जगह भी न बचती थी। कभी तो एक उन्मुक्त किस्म की मादकता और कभी शालीन सी शास्त्रीय भाव भंगिमा, सब कुछ है कजरी के नृत्य में। संगीत की धुन से साथ उसके उठते गिरते उरोजों को देख तो कई नवयुवकों की आह निकल जाती थी। और कजरी के चहेरे में जो भोलापन था वो शहर की किसी अदाकारा में न था। कजरी इज़ द बेस्ट इन द बिज़नेस।

वैसे मन तो चाहता है कि मैं कजरी की खूबसूरती का वर्णन करता ही जाऊँ, उसके अंग-प्रत्यंग की बारीकी से विवेचना करूँ। शायद आप भी यही चाहते होंगे क्योकि शुकुल जी के अनुसार आपको तो मसाला चाहिए, मगर आपको जो भी चाहिए अपने मन में उसका आनंद लीजिये। मुझे तो कहानी आगे बढ़ानी है और समय है कम। तो आइए आगे बढ़ते है।

नया स्टार्टअप

आज मंदी महल में तनाव का माहौल है। मैडम मोना ने वफादारों की मीटिंग बुलाई है। हमेशा की तरह सोफे पर मैडम और उनके सुपुत्र केतुल बैठे हैं। आस पास सारे वफादार नौकर-चाकर हाथ जोड़ कर खड़े है। आज मैडम बहुत गुस्से में हैं, न जाने किस पर गाज गिरेगी। मैडम के सबसे करीबी दो नौकर जो मंदी खानदान की नौकरी ज्वाइन करने के पहले जाने माने वकील थे। मिस्टर सिंपल सवाल, और मिस्टर बुद्धू बन्दरम् उनके सबसे पास खड़े थे। एक बूढ़ा वफादार नौकर चुप्पी सिंह थोड़ी दूर पर खड़ा था। मैडम आज कल उसका चेहरा देखना भी न पसंद करती थीं।

मैडम: “तुम लोग धीरेन्द्र के बारे में क्या कर रहे हो? एक-एक करके उसकी स्टार्टअप हमारे सारे कस्टमर्स खाये जा रही है। इन्वेस्टर्स भी उसपर पैसा लगा रहे हैं। वो हमें खुले आम चैलेंज कर रहा है कि वो हमारी कंपनी को नेस्तनाबूत कर देगा। और तुम सब निकम्मे लोग हाथ पर हाथ धर कर बैठे हो। याद रखना जिस दिन ये कंपनी बंद हो गयी तुम दो कौड़ी के लोग भूखे मर जाओगे।”

मैडम का आग बबूला होना जायज़ था। धीरेन्द्र एक नए ज़माने का सीरियल entrepreneur था। उसकी पहले की स्टार्टअप ने इन्वेस्टर्स को बहुत अच्छे रिटर्न्स दिए थे। मगर इस बार तो धीरेन्द्र ने शहर के सबसे बड़े कारोबारी मंदी खानदान के ही बिज़नेस को डिसरप्ट करने की सोच ली थी। उसके बीटा कस्टमर्स उससे बहुत खुश थे। मंदी प्रोडक्ट्स के मुक़ाबले धीरेन्द्र के स्टार्टअप की प्रोडक्ट क्वालिटी बहुत अच्छी थी, दाम बहुत वाजिब थे और तो और वो अपनी मार्केटिंग करने में भी बहुत चतुर था।

मैडम का गुस्सा देख किसी से कुछ भी बोलते न बना। केतुल अपने हाथ में मोबाइल लिए था और उस पर शायद PUBG खेल रहा था इसलिए उसका ध्यान तो इस मीटिंग पर नहीं था मगर बाकी लोग एक-दूसरे का चेहरा देख रहे थे। दो मिनट के जानलेवा सन्नाटे के बाद मिस्टर सवाल कुछ कहने की हिम्मत जुटा पाए थे। बोलने के लिए पहले 15-20 सेकंड तक गला साफ़ करते रहे। शायद मैडम का ध्यान आकर्षित करना चाहते थे।

मैडम: “अब कुछ फूटेगा तुम्हारे मुँह से या बस गला ही साफ़ करते रहोगे?”

मिस्टर सवाल: “सॉरी मैडम। दर असल एक आईडिया है।”

मैडम: “हम्म…”

इस हम्म की रहस्यमयी गुफा में न जाने कितने गये मगर लौट कर न आये। आज सवाल की इज्जत का सवाल था। केतुल को छोड़ सब लोग उसकी ही तरफ देख रहे थे की ये बूढ़ा सवाल न जाने क्या कहने वाला है।

मिस्टर सवाल: “मैडम आपने कजरी के बारे में सुना है?”

कजरी का नाम जैसे केतुल के मोबाइल में interrupt सिग्नल बन कर आया था। अपना गेम बीच में ही छोड़ केतुल एकदम से चौंक कर उठा।

केतुल: “मैंने सुना है। बहुत खूबसूरत है वो तो।”

मैडम को अनुशासन तोड़ने वाले लोग कतई पसंद न थे मगर केतुल का वो कर भी क्या सकती थीं। इकलौता बेटा था उनका। उसी के लिए तो वो ये सब कर रहीं थीं। बस एक नजर देखा केतुल की ओर और फिर देखा सवाल की तरफ सवालिया नजर से।

सवाल: “मैडम मैं कहना चाहता हूँ कि ये कजरी बहुत लोकप्रिय हो रही है। हम थोड़ा इससे coordinate करते है। वो अपने कार्यक्रमों में धीरेन्द्र के प्रोडक्ट्स की बुराई करेगी तो लोग सुनेंगे भी। इसकी पढ़े लिखे और सभ्य समाज में भी अच्छी साख है। हमारे कई कस्टमर्स इसके प्रोग्राम देखने जाते है।”

मैडम: “OK! सवाल, तेरा दिमाग तो अच्छा चलता है रे। कल ही बुला ले उसको। मैं खुद बात करुँगी।”

मैडम के चेहरे के भाव एक पल को भी नहीं बदले मगर सब समझ गए थे की मैडम को सवाल का आईडिया अच्छा लगा था। सब लोग खुश थे, और सवाल, उसे तो जैसे पर लग गए हों।

अच्छा इसी सबके बीच पता नहीं किसी ने ध्यान दिया की नहीं, एक इंसान तो बस मंद-मंद मुस्काये जा रहा था। आज की रात उसे नींद गंवारा न थी। बात ये है कि पिछत्तीस बसंत देख लेने के बावजूद केतुल बाबा के हृदय में प्रेम का पुष्प अभी तक खिला नहीं था। ऐसा नहीं था कि ये भंवरा किसी कली पर मंडराया नहीं था, मगर मैडम जी ने उसके लिए जो सपने देखे थे उनमें प्रेम का कहीं कोई स्थान नहीं था उसके जीवन में। जिस भी कली के मोहपाश में वो फंसा मैडम ने उसे मसल कर रख दिया।

लव ऐट फर्स्ट साईट

मगर आज बात कुछ और थी। आज की रात कुछ और थी।

केतुल के आलावा आज की रात दो और आँखें थीं जिनमें नींद नहीं थी। कजरी को मैडम का सन्देश रात में ही मिल गया था। पहले तो कजरी को विश्वास ही नहीं हुआ। विश्वास आया तो रात भर बिज़नेस प्लान बनाती रही। मैडम से क्या कहेगी और क्या नहीं कहेगी सब मन में कई बार रिहर्स कर लिया था। मैं अपनी खुद की नाट्य मण्डली के जो सपने देख रही हूँ शायद उसमें इतने अमीर लोगों से ही पहला निवेश मिल जाए?

कजरी मंदी महल टाइम से थोड़ा पहले ही पहुँच गयी। पता चला कि मैडम दिए हुए टाइम से पहले किसी से नहीं मिलती हैं इसलिए इंतजार करना होगा। सामने एक खूबसूरत फूलों का बाग़ था और वो वहाँ जैसे अपने आप ही खिंची चली आयी। ऐसा खूबसूरत महल और बाग़ उसने फिल्मों में या ट्रैवेल मैगज़ीन में ही देखा था। कजरी जैसे किसी दिवास्वप्न में चली गयी थी। उसके मुँह से सहसा निकल गया “हाय ये सब कितना खूबसूरत है।”

“मगर आप से ज्यादा नहीं,” एक आवाज ने जैसे उसे अपने खूबसूरत स्वप्न से जगा दिया था।

“जी थैंक यू,” सकुचाते हुए कजरी ने मुड़ कर देखा। ये केतुल है कजरी को पहचानने में क्षण भर भी न लगा, मगर कजरी वो क़ातिल है जिसके हाथों में लोग खंजर थमा कर अपना जिगर चाक होते देखना चाहते है। मर्दों की बनायी इस दुनिया में अपना मुक़ाम हासिल करने चली थी कजरी। इतनी जल्दी बोल्ड हो जाए ऐसी खिलाड़ी न थी वो।

“आप कौन?” कजरी ने पूछा।

“क्या तुम्हें सच में नहीं पता है मैं कौन हूँ?”

“जी नहीं।”

कजरी और केतुल की इस पहली मुलाक़ात का किस्सा बयाँ करते हुए पता नहीं क्यों मुझे चेतन शर्मा जावेद मियांदाद को बोलिंग करते याद आ रहे है। पता है कि बहुत ही गैर रोमानी सी उपमा है मगर लेखन का पहला उसूल है ईमानदारी। अपने पाठकों से मैं छल नहीं कर सकता।

केतुल को कुछ समझ नहीं आ रहा था। वैसे ये बात कोई समझने-समझाने वाली थी भी नहीं, सिर्फ महसूस की जा सकती थी। तीर-ए-नीमकश का दर्द तो वही बयाँ कर सकता है जिसको लगा है। कजरी का हुस्न, कजरी की सादगी और कजरी का भोलापन, केतुल के दिल-ओ-दिमाग पर आज से इसी का कब्ज़ा था।

“मैं केतुल,” केतुल बाबा उसकी तरफ टकटकी लगा कर देखते हुए बोले।

“ओह! अच्छा, माफ़ कीजियेगा, पहचाना नहीं।”

इसी बीच मैडम का बुलावा भी आ गया था। चलिए अब वहीँ चलते है।

डील

महफ़िल वैसी ही जमी है और सारे नौकर खड़े है। मगर कजरी ने पास में सोफे कि एक खाली कुर्सी देख कर उसे मैडम के पास खींच लिया और उस पर बैठ गयी। मैडम को आदत नहीं है कि लोग उनके सामने बैठें मगर ये लड़की हमारे काम की हो सकती है ये सोच कर मैडम ने इस बात को नज़र-अंदाज़ करना ही बेहतर समझा। हालाँकि अनजाने में ही सही उनकी जुबान पर कुछ एक्स्ट्रा तल्खी जरूर आ गयी थी।

इसके पहले की कजरी कुछ भी कह पाती, मैडम ने उसको हिकारत से देख कर कहा, “सुना है तू आज कल बहुत मशहूर हो रही है। मेरा एक काम करेगी?”

कजरी की हाँ या न का इंतजार किये बगैर मैडम ने सारी प्लानिंग सुना डाली और आखिर में पूछ लिया “क्या पैसे भी लेगी इसके लिए?”

कजरी अभी अपमान का घूँट पी रही थी। सोच रही थी कि क्या जवाब दिया जाये। ये एक बढ़िया डील बन सकती है। कुछ देर के स्वाभिमान के चक्कर में बढ़िया डील से हाथ न धो बैठूँ।

इधर केतुल हमेशा की तरह मम्मी के बगल में ही बैठा है। मम्मी का मंदी खानदान की होने वाली बहू से ऐसे बात करना उसे अच्छा नहीं लग रहा था मगर मम्मी की बात काट भी तो नहीं सकता है। तो मम्मी के प्रश्न ने उसको मौका दिया जिसे बिना मौका गवाएँ केतुल ने लपक कर पकड़ लिया।

“क्या मम्मी आप भी? बिना पैसों के कोई इतना बड़ा काम कैसे कर सकता है? मुझे लगता है कि कजरी जी को इस काम के लिए कम से कम सौ करोड़ लगेंगे? सही कह रहा हूँ न कजरी जी?” केतुल को समझ नहीं आ रहा था की इस कजरी को कैसे इम्प्रेस करे। पैसे की कोई भी संख्या देना खतरे से खाली नहीं है। अगर कम पैसे बोले तो कजरी उसे चीप भी समझ सकती है।

“नहीं जी, बात ये नहीं है…” कजरी ने कुछ कहना ही चाहा कि केतुल ने उसे बीच में ही टोक दिया।

“अगर सौ करोड़ कम हैं तो हजार करोड़ कर लेते हैं। आप चिंता न कीजिये हमारे पास बहुत पैसे हैं।” केतुल से अपनी घबराहट दबायी नहीं जा रही थी।

अब मैडम का गुस्सा बढ़ रहा है। इसके पहले ये लड़का मेरी पूरी जायदाद बिकवाये इस लड़की के चक्कर में, क्यों न डील फाइनल कर दी जाए।

मैडम: “ठीक है लड़की, तो डील फाइनल करते हैं। पैसे तुम्हारे पास टाइम से पहुँच जाया करेंगे मगर हमारा काम अगर ईमानदारी से नहीं किया तो बहुत पछताएगी। एक बात और, किसी को इस बात की कानों कान खबर नहीं होनी चाहिए।”

जो कुछ भी आँखों के सामने घट रहा था ये सपना था या हकीक़त? कजरी के लिए कह पाना कठिन था। अरे उसे तो हजार करोड़ में कितने शून्य होते है ये जोड़ पाना भी मुश्किल लग रहा था।

बस कह पायी, “मैडम मेरी ईमानदारी पर आज तक किसी को कभी कोई शक करने की जरूरत नहीं हुई।”

जाते जाते कजरी ने मुड़ कर एक बार केतुल की तरफ कृतज्ञ निगाहों से देखा। थैंक यू कह रही थी, मगर केतुल बाबा को पता नहीं क्यों लगा कि वो जाते जाते प्रणय निवेदन कर गयी है। क्या आग दोनों तरफ बराबर की लगी है?

कजरी की नाट्य मण्डली

कजरी को अपने प्रारब्ध पर यकीन हो चला था। वो इस दुनिया पर राज़ करने आयी है। ये शहर क्या चीज है। मेरी नृत्य मण्डली दुनिया की सबसे हसीन जगहों पर प्रोग्राम करेगी। एक से एक दुनिया भर के रईस मेरे सामने पानी भरेंगे। दुनिया की बड़ी-बड़ी पत्रिकाओं में मेरे इंटरव्यू छपा करेंगे। आज कजरी अपने आप को रोक नहीं पा रही है।

मंदी महल से घर के रास्ते में ही कजरी ने सारा प्लान सोच लिया था। अपनी नाट्य मण्डली को जल्दी से जल्दी रजिस्टर करवा कर सारी कानूनी औरचारिकताएँ पूरी करनी पड़ेंगी। चूँकि इस पैसे को बाहर नहीं दिखा सकते है तो नाट्य मंडली में लोगों से पैसा लेने का ढोंग करना पड़ेगा। मण्डली का नाम ही ‘आप का पैसा’ रख देंगे ताकि किसी को कोई शक न हो।

कल ही कुछ न्यूज़ चैनल वाले बता रहे थे कि धीरेन्द्र के प्रोडक्ट्स में कोई दम नहीं है। बस मार्केटिंग के दम पर वो लोगों को बेवकूफ बना रहा है। लेकिन उसकी मार्केटिंग मेरे नृत्य के सामने कहाँ ठहरेगी? लोगों को उसके विरुद्ध विश्वास दिलाना बहुत कठिन न होगा। लोगों को शक न हो इसलिए मंदी के प्रोडक्ट्स की भी थोड़ी बहुत कमियाँ बता दिया करुँगी।

‘आप का पैसा’ नृत्य मंडली ने शुरुआत से ही खूब धूम मचाई। ये कजरी की लोकप्रियता का ही असर था कि कई लोगों ने खुद अपनी नौकरियाँ छोड़ कर ‘आप का पैसा’ नृत्य मण्डली को सफल बनाने का जिम्मा लिया।

हालाँकि इधर कजरी जब अपने इंटरव्यूज और प्रोग्राम्स में धीरेन्द्र के प्रोडक्ट्स को भला बुरा कहने लगी, तो लोगों को ये कुछ अजीब लगा मगर उन्होंने इसे कजरी का भोलापन समझ कर नज़र अंदाज़ कर दिया।

अधूरा प्यार

इधर जबसे केतुल बाबा की आँखें कजरी से चार हुई थीं उनका पिछत्तीस वर्षीय कोमल बाल मन कभी स्थिर हो ही नहीं पाया था। बस तसव्वुरे-जाना किये बैठे रहते थे। एक मीठी मीठी सी खलिश हर वक़्त रहती थी।

चूँकि उन्हें शक था की मम्मी ने कजरी का फ़ोन टैप करवाया है वो उसे कभी कॉल नहीं करते थे। । केवल व्हाट्सएप्प सन्देशों से काम चला लेते थे। ज़माने को कजरी और केतुल का प्यार पता न चले इसलिए वो सन्देश करते ही उसे डिलीट भी कर देते थे।

शुरू शुरू में कजरी ने जरूर उनके कुछ सन्देशों का जवाब दिया, जिसे लेकर केतुल बाबा को ऐसा लगा कि वो भी इनसे उतना ही प्यार करती है जितना ये उससे। मगर जैसे जैसे कजरी की नाट्य मण्डली आगे बढ़ी कजरी के पास केतुल बाबा के सन्देशों के लिए समय नहीं रह गया था।

कजरी दरअसल एक महत्वकांछी और नए ज़माने की महिला थी। उसके लिए प्रेम उसकी तरक्की में रोड़ा था। वो इन सब झंझटो में नहीं पड़ना चाहती थी।

कई एक तरफ़ा व्हाट्सएप्प सन्देशों के बाद एक समय ऐसा आया जब केतुल कजरी से मिलने के लिए बेकरार हो गया। उसने कजरी को अंतिम चेतावनी दे दी, “वो उससे मिलने आ रही है कि नहीं? नहीं तो वो दुनिया को उसकी नाट्य मण्डली का सच बता देगा” केतुल के मन में तो सिर्फ कजरी के लिए प्रेम की ज्वाला थी जो उसे मजबूर कर रही थी। वो सच में थोड़े ही कुछ करने वाला था। प्रेमी कहीं एक-दूसरे के साथ ऐसा विश्वासघात करते हैं?

मगर कजरी इस सन्देश को पढ़ कर आग बबूला हो गयी। गुस्से में आ कर उसने एक ऐसा सन्देश लिखा जो उसे कभी नहीं लिखना चाहिए था। ये वही वाला सन्देश है जिसका ज़िक्र मैंने इस कहानी का श्री गणेश करते समय किया था।

“प्यारे केतुल बाबा। भूल कर भी ऐसी गलती नहीं करना। तुम्हारे खानदान के काले कारनामों के कच्चे चिट्ठे हैं मेरे पास। जिस दिन मैंने वो पब्लिक कर दिए तुम लोगों को पानी भी नहीं मिलेगा इस शहर में। और प्यार-व्यार तो भूल ही जाओ। तुम्हारे जैसे मंदबुद्धि इंसान से कौन प्यार कर सकता है? तुम्हें मेरा background पता है न? इस शहर के सबसे टॉप के स्कूल से पढाई की है मैंने। आज दुनिया में लोग मेरे दीवाने हैं। तुम चीज क्या हो?”

रात के करीब १० बजे होंगे जब केतुल को कजरी का ये संदेश मिला। बीप की आवाज़ आते ही केतुल ने जैसे ही फ़ोन उठाया और नोटिफिकेशन में कजरी का नाम देखा, केतुल की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसे लगा मेरी कजरी ने आखिरकार मेरे लिए समय निकाल ही लिया। मगर जैसे जैसे उसने सन्देश पढ़ा उसका दिल बैठने लगा। ये कजरी तो शायद मुझसे कभी प्रेम करती ही नहीं थी। केतुल की सारी ख़ुशी एक अजीब किस्म के ग़म में बदल गयी थी। ऐसा लगा जैसे सर पर किसी ने बहुत जोर से प्रहार किया हो। गिरते-गिरते भी केतुल ये वाला व्हाट्सएप्प सन्देश डिलीट करना नहीं भूला था। वो अभी भी सोच रहा था की कजरी पर कभी कोई इल्जाम नहीं लगना चाहिए।

केतुल बाबा के कमरे के बाहर खड़े उनके बॉडीगार्ड ने उस रात दो आवाजें सुनी। पहली ‘ठऽऽऽ ढाँग’ ये शायद केतुल बाबा का मोबाइल उनके हाथ से छूट कर गिरने की आवाज थी, और दूसरी ‘ढऽऽऽ प्प!’ क्या ये केतुल बाबा के गिरने की आवाज़ है? उसको लगा कि दाल में कुछ काला है। वो भाग कर अंदर गया, और केतुल को अपने हाथों में ही उठा कर भागा।

ऑपरेशन

एक घण्टे के अंदर अंदर सारी मॉडर्न स्वास्थ्य सुविधाओं से लैस एक विमान न्यूयॉर्क के रास्ते पर था। विमान में डॉक्टर्स और नर्सेज के अलावा मैडम मोना और उनका एक और वफादार डिक्की सवार थे। मैडम मोना ने रोना कभी सीखा ही नहीं था। कजरी की ही तरह उन्होंने भी मर्दो की बनायीं इस दुनिया में अपना एक अलग मुक़ाम बनाया था। शायद इसी वजह से वो थोड़ा पत्थरदिल हो गयीं थी। मगर आज उनका दिल भारी था। केतुल ही तो था इकलौता वारिस उनके इतने बड़े कारोबारी साम्राज्य का।

न्यूयॉर्क के सबसे जाने माने ब्रेन सर्जन डॉक्टर गाएथोंडे दुनिया भर में जानी मानी हस्ती हैं। मैडम मोना के एक कॉल पर उन्होंने सारे अपॉइंटमेंट्स कैंसिल कर दिए।

हॉस्पिटल के गलियारे में मैडम तेज तेज कदमों से चहलकदमी कर रही हैं और डिक्की उनके पीछे पीछे। पता नहीं क्या कहेंगे डॉक्टर गाएथोंडे।

थोड़ी ही देर में डॉक्टर साहब प्रकट हुए।

डॉक्टर गाएथोंडे: “मैडम बैड न्यूज़ ये है कि बहुत ज्यादा ब्रेन डैमेज है। गुड न्यूज़ है की हम केतुल बाबा को बचा सकते है। आज हेल्थ साइंसेज इतना तरक्की कर गयी है कि इसमें कोई चमत्कार नहीं रह गया है। मगर टाइम बहुत कम है।”

मैडम: “तो देर क्यों कर रहे हैं डॉक्टर? ऑपरेशन शुरू करिए।”

डॉक्टर गाएथोंडे: “बस आपका कॉन्सेंट लेना था। कुछ जरूरी बातें आपको बतानी हैं। ऑपरेशन के बाद 3-4 महीने लगेंगे केतुल बाबा को पूरी तरह रिकवर होने में। वैसे तो उन्हें जीवन के सामान्य कार्यों में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए, मगर उनकी याददाश्त और सोचने समझने की क्षमता काफी कम हो जाएगी। एक बार में 3-4 बातों से ज्यादा याद नहीं रख पाएँगे।”

मैडम (काफी बुझे मन से): “केतुल को बचाना हमारी प्राथमिकता है अभी। आप जाइए मैं साइन कर देती हूँ।”

डॉक्टर गाएथोंडे के जाने के बाद मैडम धीमे धीमे से डिक्की की तरफ मुड़ीं। डिक्की उनका चेहरा ऐसे देख रहा था जैसे किसी का पालतू जानवर अपने मालिक के दुखी चेहरे को पढ़ लेता है, लेकिन उसे पता नहीं होता है कि करना क्या है?

मैडम: “सोचने समझने की क्षमता, याददाश्त कम हो जाएगी? वैसे ही बिज़नेस में इतनी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, पहले तो हमें कस्टमर्स का चेहरा देखने की भी जरूरत नहीं होती थी, मगर अब वो कहते हैं आप आईए और अपने प्रोडक्ट्स के बारे में बताइए। धीरेन्द्र इतना चालू और तेज दिमाग वाला है, उसका सामना कैसे कर पायेगा केतुल?”

डिक्की को पता था कि पहले ही केतुल के लिए ये सब कुछ मुश्किल था अब तो समस्या और गंभीर हो जाएगी। मगर डिक्की आसानी से हार मान जाने वालों में से नहीं है? उसने खुद मार्केट में अपने इन्नोवेटिव मार्केटिंग कैम्पेन से अपनी एक साख बनायी थी। इस कैंपेन का नाम उसने ‘बिलो द बेल्ट’ कैंपेन दिया था।

सवाल: “मैडम वो सब आप मुझ पर छोड़ दीजिये। केतुल बाबा को हम लोग 3-4 बातें ही याद करवा देंगे जो वो हर कस्टमर मीटिंग में बोलेंगे। बाकी कोई ज्यादा प्रश्न होंगे तो हम सब हैं ही। हम लोगों के होते हुए बाबा के ऊपर कोई आँच नहीं आने देंगे।”

डिक्की के गंजे सर के नीचे बिल्ली जैसी शरारती आँखे थीं, और उन आँखों पर मोटे फ्रेम का चश्मा। एक बार किसी कस्टमर ने डिक्की के चेहरे पर बहुत गुस्से में एक मुक्का मारा था इसलिए उसकी नाक बिलकुल भद्दी सी हो गयी थी। मगर मैडम को वो अपने सारे चमचों में सबसे ज्यादा पसंद था। मैडम ने उसके चेहरे को ध्यान से देखा, और हलकी सी मुस्कान के साथ जाने अनजाने ही उनके मुँह से निकल गया, “तू कितना बदसूरत है रे डिक्की?” मैडम के ऐसा कहते ही डिक्की के गाल सुर्ख लाल हो गए। ऐसे वो अपने आप में सिमट गया जैसे कोई नयी नवेली शरमा जाये। और फिर बोला “मैडम, मैं केतुल बाबा के खूबसूरत चेहरे पर काला टीका हूँ, उनको हर बुरी नजर से बचाने के लिए।”

मैडम: “ठीक है, अच्छा पता करो ये कजरी अपना काम तो ठीक से कर रही है न? कभी कभी हमारे बारे में भी उल्टा-सीधा बोलती है।”

डिक्की: “वो उसकी रणनीति का हिस्सा है मैडम। मगर मुझे लगता है कि उस पर कुछ ज्यादा ही बड़ा दाँव खेल दिया हमने। कुछ खास रिटर्न्स नहीं आ रहे हैं।”

मैडम: “तो बंद करो उसकी फंडिंग आज से ही।”

“जी मैडम” डिक्की ये कह कर तुरंत फ़ोन पर किसी को आदेश देने लग गया।

आखिरी अध्याय

केतुल बाबा के ऑपरेशन को एक साल होने आया है। सर पर बाल पूरी तरह से वापस आ गए हैं। लेज़र से वैसे भी ऑपरेशन के सारे नामोनिशान मिट चुके है। ऑपरेशन बहुत ज्यादा कामयाब भी हुआ है। धीरे धीरे केतुल बाबा ने अपनी दिनचर्या में लौटना शुरू कर दिया है। मंदी परिवार के चंद अंदरूनी लोगों को छोड़ कर किसी को भी ऑपरेशन के बारे में कुछ भी मालूम नहीं है। जिन लोगों की मंदी परिवार के पुराने उत्पादों से आज भी मीठी यादें संजी हैं, उनमे केतुल बाबा में धीरेन्द्र को खत्म करने की पूरी काबिलियत दिखाई देती है।

चूँकि मैडम अब बूढ़ी हो चलीं हैं, तो सारे चमचो ने मैडम को मना लिया है कि केतुल बाबा को मंदी कारोबार की पूरी जिम्मेदारी सौंप दी जाये। अब सारे फैसले केतुल बाबा ही लिया करेंगे। दरअसल आप समझ ही गए होंगे कि केतुल बाबा का तो सिर्फ नाम होगा, अब ये साम्राज्य चमचों के ही हाथ होगा।

इधर शुरुआती जोश और धूम के बाद कजरी की नाट्य मण्डली कुछ खास आगे बढ़ नहीं पा रही है। इसके दो कारण साफ़ दिखाई दे रहे हैं।

पहला, अपनी कला को बढ़ाने से ज्यादा धीरेन्द्र के स्टार्टअप पर अत्यधिक ध्यान। आम प्रशंसक इस बात से काफी चिढ़ रहे थे।

दूसरा, ज्यादा से ज्यादा प्रशंसक प्राप्त करने के फेर में अपने नृत्य में फूहड़ और अश्लील किस्म के कुछ नृत्य पद जोड़ देना। पढ़ा लिखा और सभ्य समाज इस बात पर कुपित था।

धीरे धीरे प्रशंसक कम हो रहे हैं, तो सिर्फ नृत्य के प्रोग्राम कर के इतना पैसा आ नहीं सकता है। मंदी परिवार से मिलने वाली फंडिंग बहुत पहले बंद हो चुकी है। कजरी की हताशा की कोई सीमा नहीं रही है।

कजरी की हताशा का ये आलम है कि वो अब रंगमंच के अलावा लोगों के निजी कार्यक्रमों में भी नृत्य करती है। मैं ऐसे किसी निजी कार्यक्रम में खुद नहीं गया हूँ इसलिए कह नहीं सकता की वहाँ क्या होता होगा मगर सोचता हूँ की कभी कभी अगर कोई धनाढ्य व्यक्ति किसी ‘खास आइटम’ की फरमाइश कर देता होगा तो क्या कजरी मना कर पाती होगी? आखिरकार इन्ही लोगों से तो उसकी मंडली चल रही है।

रोज़ रोज़ की जिल्लत अब कुछ ज्यादा हो रही थी कजरी के लिए। आज उसने फैसला कर ही लिया कि वो केतुल से मिलने जाएगी और पुराने प्यार का वास्ता देगी। क्या पता उसका दिल पिघल ही जाए। काश मैंने उस दिन व्हाट्सएप्प पर वो सब नहीं लिखा होता। काश की वो दिन एक बार फिर वापस आ जाए और मैं सब कुछ पहले जैसा कर दूँ। बस एक बार! बस एक बार केतुल मेरे को अपना ले! मैं केतुल को इतना प्यार दूँगी कि इस ज़माने में किसी ने किसी को नहीं दिया होगा।

मगर सच तो यही है कि दुनिया की तमाम धन सम्पदा दे कर भी आप गुजरा हुआ पल वापस नहीं ला सकते। अब तो कजरी को कल की मीटिंग के बारे में सोंचना है जो केतुल और डिक्की के साथ तय हुई है।

अगले दिन कजरी केतुल से मिलने पहुंची तो उसने देखा कि केतुल बाबा ने उसे पहचाना भी नहीं। पता है बहुत नाराज़ हो मुझसे। तुम्हारी नाराज़गी तो एक पल में ही दूर कर दूँगी। एक बार मेरी तरफ देखो तो।

बात की शुरुआत डिक्की ने की: “देखिये कजरी जी, आपको पैसे जिस काम के लिए दिए जा रहे थे, हमें उसका कोई फायदा नहीं हो रहा है। दर असल ये एक प्रयोग था जो सफल नहीं हुआ। अब हम आपकी कोई मदद नहीं कर सकते।”

कजरी डिक्की को नजर अंदाज करके केतुल की तरफ टकटकी लगा कर देखे जा रही है। केतुल कभी उसकी तरफ देख कर मुस्कुरा देता तो कभी कहीं और देखने लग जाता। समझ नहीं आ रहा है नाराज है या कजरी से छेड़खानी कर रहा है।

कजरी: “केतुल जी, जरा सुनिए। दर असल हमारी नृत्य मण्डली…”

केतुल को जैसे ही नृत्य शब्द सुनाई दिया वो चहक कर बोला, “तुम डांस करती हो ना? मुझे तुम्हे देख कर ऐसा ही लगा था। मुझे भी कर के दिखाओ ना प्लीज।”

डिक्की जैसे तलवे चाटने वाले डॉगी के लिए ये इशारा ही काफी था। उसने तुरंत सारा इंतजाम कर दिया और कजरी को नृत्य का इशारा दे डाला।

अगर मेरे पापों का ये प्रायश्चित है तो यही सही, कजरी ने एक खूबसूरत नृत्य पेश करना प्रारम्भ किया।

केतुल को ज्यादा मजा नहीं आ रहा है या उसका ध्यान कहीं और है। डिक्की को पता है कि केतुल का मस्तिष्क अब बहुत कम देर ही स्थिर रह पाता है, उसे शायद याद ही नहीं थोड़ी देर पहले उसने क्या कहा था।

पूरा नृत्य ख़तम होने के बाद केतुल का ध्यान अचानक कजरी पर आ गया, “क्या आप डांस करती हैं? कुछ दिखाइए न प्लीज?”

कजरी ठगी सी महसूस कर रही है। ये केतुल मेरे साथ मजाक कर रहे हैं क्या? इतने में डिक्की भौंक उठा (उफ़ माफ़ कीजियेगा, मेरा मतलब था कि बोल उठा), “कजरी तुम्हे एक प्रोग्राम और पेश करना होगा साहब को।”

कजरी भारी कदमों से चल चुकी है फिर से एक और प्रोग्राम पेश करने। केतुल का ध्यान फिर कहीं और चला गया है, और डिक्की मुफ्त में फिर से कजरी के नृत्य का आनंद लेने बैठ गया है। अगर कजरी और केतुल के प्रेम की त्रासदी इसमें न होती तो ये दृश्य बड़ा हास्यास्पद सा लगता।

मुझे लग रहा है इसी मोड़ पर कहानी की इति श्री कर देनी चाहिए।

क्योंकि अब पता नहीं, केतुल न जाने कितनी बार कजरी से नृत्य की फरमाइश करेगा, और हर बार कजरी को उसकी फरमाइश पूरी करनी पड़ेगी क्योंकि डिक्की का बूढा मन इसी बहाने अपनी जवानी की सारी कल्पनाओं को सामने साकार होते देखेगा। इस प्रेम कहानी का सुखद अंत होना संभव ही नहीं था। केतुल का मस्तिष्क करीब करीब खाली है ये बात कजरी को पता नहीं है, और मंदी कारोबार के लिए कजरी का कोई उपयोग नहीं रह गया है इसलिए कोई भी वहां कजरी की कोई मदद करेगा नहीं।

आखिरी समाचार मिलने तक कजरी रोज ही मंदी महल के चक्कर काट रही थी। मगर आप पाठकगण कजरी के भविष्य को ले कर दुखी मत होइएगा। मर्दों की बनाई इस दुनिया में कजरी अपना मुकाम हासिल करके ही रहेगी एक दिन।

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