06 अप्रैल

पुण्य सँजो कई जन्मों का

पुण्य सँजो कई जन्मों का इस बार धरा पे आया हूँ
अब झेलो मुझको, मैं तुम सबके पाप गिनाने आया हूँ

चाहा तो तुमने भी होगा कि मुझसे रिश्ता टूट सके
राह बदल कर, चाल बदल कर, मुझसे पीछा छूट सके
पर भाग्य ठगे न केवल मुझको, तुम भी उससे हारे हो
घूम-फिरे तुम दुनिया भर पर फिर भी साथ हमारे हो
बचा रह गया, भूला-बिसरा उधार चुकाने आया हूँ
पुण्य सँजो कई जन्मों का इस बार धरा पे आया हूँ

अब साथ चल रहे मेरे तुम जो, थोड़ा ये उपकार करो
झेल रहे हो मुझको कब से, तो इतना और यार करो
लेन-देन का ये खाता, भई इसको यों ही चलने दो
हिसाब बराबर न हो देखो, कुछ तो बाकी रहने दो
समझो यों अगले जन्मों का व्यापार बढ़ाने आया हूँ
पुण्य सँजो कई जन्मों का इस बार धरा पे आया हूँ

सतीश चन्द्र गुप्त

आई. आई. टी. कानपुर से रासायनिक अभियांत्रिकी में 1996 में बी.टेक.। विस्कॉन्सिन यूनिवर्सिटी, मिल्वॉकी से कंप्यूटर विज्ञान में 2001 में परास्नातक। अभी स्लैंग लैब्स कंपनी के सह-संस्थापक। मुझे कंप्यूटर प्रोग्रामिंग में सांत्वना, हिन्दी कविता में आनन्द, और हिमालय की ऊँचाइयों पर बहते हिमनदों में एकान्त की अनुभूति प्रियकर है।

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