प्रविष्टि भेजने के नियम

  • रचनाएँ मौलिक होना अनिवार्य है।
  • सृजन एक अव्यवसायिक पत्रिका है, इसमें किसी रचना के प्रकाशन के लिए लेखकों से धन का कोई लेन-देन नहीं होता। इस पत्रिका के प्रकाशन से जुड़े सभी व्यक्ति स्वैच्छिक अवैतनिक कार्यकर्ता हैं। यह पत्रिका अंतरजाल पर नि:शुल्क उपलब्ध है।
  • रचनाएँ हिंदी साहित्य की किसी भी विधा जैसे कविता, कहानी, लघुकथा, लेख, व्यंग, साक्षात्कार आदि में हो सकती हैं।
  • रचनाओं का विषय व्यक्तिगत अनुभूतियाँ, सामाजिक परिस्तिथियों पर विचार, या साहित्यिक ज्ञान-वर्धक (जैसे कवि, लेखक, उनकी शैली, विधा, विभिन्न रचनाओं/पुस्तकों के पीछे छिपे किस्से) हो सकते हैं; लेकिन इस तक ही सीमित नहीं है, किसी भी प्रासंगिक विषय पर लिखा जा सकता है।
  • रचनाएँ देवनागरी लिपि में unicode plain text file में होनी चाहिए, आप उसे attachment के बजाय email body में भी लिखकर भेज सकते हैं। रोमन लिपि में, किसी अन्य font में जो unicode से पहले प्रचलन में थे, या किसी अन्य file format जैसे Microsoft Word, pdf आदि में भेजी रचनाएँ स्वतः अस्वीकृत होंगी। आप Google Input Tools से यह आसानी से कर सकते हैं। हमारा पता है: hindi.editors@srijanpatrika.com
  • कृपया अपनी रचनाओं को पढ़ें और वर्तनी (spelling) की गलतियों को ठीक करें। कुछ एक गलतियाँ स्वाभाविक हैं, परन्तु यदि बहुतायत में होंगी तो संपादक मंडल के लिए उनपर विचार करना संभव न हो सकेगा।
  • रचनाओं के साथ अपना नाम, काम-धाम, email, और अपना परिचय लिखना न भूलें। साथ ही अपनी LinkedIn, ट्विटर, फेसबुक प्रोफाइल का लिंक भी दें।
  • पत्रिका के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए रचनाओं में उपयुक्त संपादन करने का अधिकार संपादक मंडल के पास है। संशोधन के उपरांत रचना लेखक को भेजी जाएगी। यदि संशोधन लेखक को स्वीकृत न हो तो लेखक को उसे वापस लेने का अधिकार है।
  • कृति की विषय-वस्तु के अनुसार संपादक उसके साथ कोई चित्र भी प्रकाशित कर सकते हैं।
  • रचना की स्वीकृति की सूचना भेजने में एक महीने का समय लग सकता है। अस्वीकृति के कारणों पर विचार-विमर्श समयाभाव के कारण हो सकता है कि हमेशा संभव न हो। हम इस विषय पर आपके सहयोग की आशा रखते हैं।
  • सभी प्रकाशित रचनाओं के सर्वाधिकार उनके लेखकों एवं प्रकाशक के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है।
  • प्रकाशित रचनाओं में विचार उनके लेखकों के निजी विचार हैं। इनसे संपादक मंडल का सहमत होना आवश्यक नहीं है।